एक बार फिर से.....

Hi guys!!! This is my very first attempt at a Hindi poem. So please let me know whether there's any scope for improvement or should I just not attempt writing in Hindi ever again.

And what made me write a Hindi Poem? It was a mail from Bultu dada asking me to give feedback on two couplets, written by him, in Hindi. Its from there I thought that why not Hindi? So, here it is:

वक़्त भी कितना अजीब है कि इसका खेल तो देखो,
लगता है जैसे कल ही कि बात है जब टकराए थे तुमसे उन गलयिओं में,
पर जिस दिन चले गए तुम उन गलियों से मुड़कर,
लगता है जैसे सदिया गुज़र गयी है दरवाज़े पर तुम्हारे इंतज़ार में.

कुछ रंग अभी भरने बाकी है मेरी ज़िन्दगी में,
पिछली बार जो नहीं भरे थे, एक बार आकर उन रंगों को तो भर जाओ.
उस रात से अब तक बाल उलझे हुए है मेरे,
एक बार आकर अपनी उंगलियों से मेरे बालों को सुलझा तो जाओ.

भूल गयी हू आखिरी बार कब मुस्कुरायी थी,
एक बार फिर से मेरे कानो में कुछ कहो और इन होठो पर मुस्कराहट तो ले आओ.
इस भीड़ में अकेले कई बार गुम हो जाती हू मैं,
एक और बार मेरा हाथ पकड़ो और मेरे हमसफ़र बनकर मुझे राह तो दिखाओ.

याद नहीं है आखिरी बार कब सोयी थी मैं,
एक बार फिर से अपने कंधे पर मेरा सिर रखकर कोई गीत गुनगुनाते हुए मुझे सुलाओ.
अब तो आंसू भी सूख चुके है तुम्हारे इंतज़ार में,
आँखें बंद होने से पहले एक बार इन आँखों को अपना चेहरा तो दिखा जाओ.

ना चुड़िया पहनी, ना श्रृंगार किया,
याद नहीं है आखिरी बार कब मैंने आईने में अपना दीदार किया,
तुम थे ही नहीं देखने के लिए मुझे इतने दिनों,
बस तुम्हारी याद मैं मैंने सिर्फ तुम्हारा इंतज़ार किया.

P.S. I'm perfectly alright. I didn't have an ugly break up. It's just my way of writing. So, please so not ask me questions like "What's wrong with you?" or "Are you alright?".